अब किससे शिकवा करें, जब अपना ही दिल बेवफाई कर गया?
दिल रोता रहा, दर्द बढ़ता गया, जिसे चाहा था, वही दूर होता गया।
मोहब्बत दिल से की थी मगर किस्मत से हारी,
अब किसी से प्यार करने से डर लगता है, जो अपना बनता है, वही दर्द दे जाता है।
तेरी यादों से गुज़रने का हौसला रखता हूँ, हर रोज़ जलता हूँ, हर रोज़ बुझता हूँ।
तुमसे जितना प्यार किया था, उतना ही दुख सहना पड़ा,
वो कहते थे साथ निभाएंगे, पर वादा करके भी निभा ना सके।
हमारी खामोशी को कभी तुमने आवाज़ नहीं दी…!!!
न जाने कौन सी सजा दे गई मोहब्बत मुझको, कि तेरा Sad Shayari होते हुए भी तेरा नहीं हूँ।
जैसे सपना टूटा हुआ और बिखरा सा लगता है।
दिल से खेलना हमने तुमसे सीखा, अब तुम्हारे बिना जीना भी तुमसे सीख लेंगे।
तेरी मोहब्बत अधूरी रही, पर मेरा प्यार पूरा था।
मैंने तुझसे बिछड़ कर भी तुझसे मोहब्बत की है, तू बेवफा था और मैं आज भी वफादार हूँ।
In a planet exactly where thoughts often go unexpressed, न्यू सैड शायरी serves like a poignant reminder of the guts’s struggles. For the people sensation missing or heartbroken, these verses resonate deeply, specifically for boys navigating their very own emotional landscapes.